चंद्र ग्रहण पर बन रहा काल सर्प योग, शिव आराधना से कम करें ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव

साल का पहला ग्रहण 31 जनवरी को है। ये पूर्ण चंद्र ग्रहण यानी खग्रास चंद्र ग्रहण है। इस बार ग्रहण के समय लगभग सारे ग्रह राहु और केतु के घेरे में रहेंगे। ये स्थिति काल सर्प दोष का निर्माण भी करती है। माघ मास की पूर्णिमा यानी 31 जनवरी को शाम 5 बजकर 57 मिनट से चंद्र ग्रहण शुरू हो जाएगा। ये 2 घंटा 43 मिनट के कुछ बाद रात 8 बजकर 8 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगा। इसका सूतक सुबह करीब 7 बजकर 05 मिनट पर शुरू होकर रात 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। खग्रास चंद्रग्रहण शाम करीब 6 बजकर 22 मिनट से शुरू होगा और 7 बजकर 37 मिनट पर खत्म होगा।

चंद्र ग्रहण के दौरान ग्रहों की स्थिति और प्रभाव

चंद्र ग्रहण इस बार खुद चंद्रमा की राशि कर्क में पड़ रहा है। इस दौरान कर्क में चंद्रमा के साथ राहु भी रहेगा। राहु और केतु के घेरे में सारे ग्रह होंगे। ये स्थिति काल सर्प योग का निर्माण करती है। पुष्य और अनुराधा नक्षत्र में जन्म लेने वालों के लिए ये ग्रह स्थिति ठीक नहीं है। अष्लेशा और रेवती नक्षत्र में जन्म लेने वालों के साथ यही स्थिति रहेगी। आपको चंद्र ग्रहण के दौरान बहुत सावधानी बरतने की जरूरत रहेगी।

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 पिंड दान और तर्पण से कम होता है ग्रहण का असर 

चंद्र ग्रहण के दौरान ही काल सर्प योग का निर्माण हो रहा है। इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए महा मृत्युंजय वैदिक मंत्र का जप करें। मंत्र की 11 माला जपना कल्याणकारी रहेगा। इस दिन संपुटयुक्त महा मृत्‍युंजय मंत्र की एक माला जपना ठीक रहेगा। मंत्र है…ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ …। चंद्रग्रहण के दौरान ‘ऊँ नम: शिवाय’ और ‘ऊं नमो भगवते वसुदेवाय’ मंत्र का जप भी लाभकारी रहेगा। पुरखों का तर्पण करने से भी तमाम नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति मिल जाती है।

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