सर्दी की छुट्टी में एक और हुनर सामने आया

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बारिश का एक रंग एेसा भी..

बारिश सिर्फ बूंदें लेकर नहीं आती। ये तरह तरह की आफस भी साथ लाती है। ये वायरल वीडियो नोएडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन का है। बुधवार शाम को हुई बारिश ने मेट्रो स्टेशन पर एेसी भीड़ जमा कर दी कि लोगों को सांस लेना मुश्किल हो गया। रास्ते की तरफ तो ये हाल हुआ कि रिश्ते तार-तार होने लगे। भाषा शालीनता की हदें तोड़ने लगी और फिर जो हुआ वो आपके सामने है।

 

ये कहां आ गए हम यूं हीं बातें बनाते बनाते

हम आईना खुद देखेंगे नहीं। कोई और दिखाएगा तो टीवी चैनलों पर खीझ निकालेंगे। नतीजा सामने है। हम दुनिया के उन 13 खतरनाक देशों में शामिल हो गए हैं जहां जाना रिस्क से भरा है। ये हम नहीं कह रहे हैं। ये कहना है वल्र्ड इकनॉमिक फोरम का। उसने ग्लोबल ट्रैवल एंड […]

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वाह रे पाक ! तो क्या अब सैनिक पता लगाएंगे अच्छे और खराब ‘मेहमानों’ का

पाकिस्तान के हालात पर एक नजर

पाकिस्तान में जनगणना होने वाली है। इतना जरूरी काम याद आया करीब दो दशक बाद। लेकिन, जेहन में चिंता ये कि पोलियो अभियान की तरह इसे भी मुल्क  में बैठे आतंक के आकाआें की कहीं नजर न लग जाए। सो, निकाल लिया एंसा रास्ता कि जितने जनगणनाकर्मी लंगेंगे काम पर, उतने सैन्यकर्मी भी उनके साथ छाया की तरह रहेंगे।

आप किसी मुगालते में न रहिएगा कि जनगणना के नाम पर ही सही, पाकिस्तान में कुछ अच्छा होने जा रहा है। दरअसल, पहले कश्मीर और अफगानिस्तान में आतंक फैलाने के नाम पर पाक सेना ने अपने देश में आतंक की फैक्टरी खड़ी की। उस फैक्टरी में देशी-विदेशी यानी सभी आतंकी भरे गए। यही आतंकी अब उनके लिए नासूर बन गए हैं। वे सैनिक स्कूल, दरगाह और सार्वजनिक स्थलों पर निरीह लोगों को मार रहे हैं। न वे सरकार से डरते हैं, न सेना में बैठे आकाओं की परवाह करते हैं। पाक सेना तो अच्छे बुरे आतंकी के फेर में रही, पर दहशतगर्द पाकिस्तान के हर इलाके में पहुंच गए।

पानी सिर से ऊपर गुजर गया तो उनका पता लगाने की चिंता सेना को हुई। बस करीब 20 साल बाद जनगणना कराने की तैयारी हो गई। सेना के प्रवक्ता ने इस अभियान के असल मंसूबे का बड़ी होशियारी से इशारा कर दिया। उनके मुताबिक, हर जनगणनाकर्मी के साथ एक सेना का जवान रहेगा। जनगणनाकर्मी अपनी जानकारी जुटाएगा, सैन्यकर्मी अपनी।

पाकिस्तान में आतंकी किस कदर सिस्टम को लील चुके हैं, ये सरकार के इस कदम से पता चलता है। जो काम सिविल कर्मचारी आराम से कर सकते हैं, उसके लिए दो लाख जवान अतिरिक्त तैनात होंगे। ये जवान चुपचाप रहकर अपने लिए फी जुटाएंगे। सीधे शब्दों में कहें तो ‘बिन बुलाए मेहमानों’ का पता लगाएंगे। वैसे ओसामा बिन लादेन जैसे मेहमानों  को यही पाक सेना पाल भी चुकी है। तो सवाल उठता है कि जनगणना में अच्छे और बुरे “मेहमान” की पहचान करेंगे सैन्यकर्मी।

 

 

 

पाक में शांति का कबूतर बना क्रिकेट

क्रिकेट के जरिए कैसे शांति का संदेश दिया जा सकता है, ये दिखा दिया वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी ने

पाकिस्तान के बाशिंदों को बड़े दिनों से रोज एक बुरी खबर सुनने की जैसे अादत सी पड़ने लगी थी। एेसे में संडे की शाम लाहौर के कद्दाफी स्टेडियम में पहली पाकिस्तान सुपर लीग का  सफल आयोजन होना एक खुशनुमा हवा के झोंके की तरह महसूस हुआ। न सिर्फ पड़ोसी  मुल्क में शांति चाहने वालों को, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया को ये एक बड़ी राहत भरी खबर मिली।

पड़ोसी मुल्क कभी हाफिज सईद, कभी लखवी तो कभी मसूद अजहर की हरकतोंं के कारण भारत समेत पूरी दुनिया की आंख की किरकिरी बनता रहा है। वहां की तमाम बड़ी राजनीतिक हस्तियां भी शांति का कोई ठोस रास्ता नहीं निकाल पाईं। एेसी विषम परिस्थितियों में काम आया क्रिकेट। लाहौर के क्रिकेटप्रेमियों को समी और दूसरे विदेशी क्रिकेटरों को अपनी जमीं पर खेलते देखने का अवसर मिला। आम शहरी शांति चाहता है, क्रिकेट चाहता है, खेल चाहता है। ये संदेश देने के लिए कट्टर मानी जानी वाली पार्टी के मुखिया खुद कद्दाफी स्टेडियम पहुंचे। तमाम आतंकी खतरों को चुनौती देकर स्टेडियम पहुंचे दर्शकों का लाहौर के मेयर ने हाथ मिलाकर स्वागत किया। पत्रकार से प्रशासक बने नजम सेठी ने लाहौर में पीएसएल का फाइनल आयोजित करवाकर साबित कर दिया कि उम्मीद अभी मरी नहीं है। विदेशी खिलाड़ियों ने लाहौर के स्टेडियम में उतरकर संदेश दिया कि पाकिस्तान शांति का खेल खेलेगा तो दुनिया उसके साथ चलने को तैयार है। लेकिन, आतंक के आकाओं का साथ जारी रखा तो दुनिया में अलग-थलग पड़ जाओगे।

करीब दस साल बाद क्रिकेट के पाक में लौटने, उसकी खुशी में सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों के झूमने से शांति के लिए बड़ी उम्मीद जगी है। ये पाक के सियाती आकाओं को तय करना है कि वे इस खुशी को आगे बढ़ाएंगे या फिर से हाफिज सईद जैसे शांति के दुश्मनों के दबाव में कदम पीछे खींच लेंगे। उम्मीद बेहतर की ही करनी चाहिए। c6kbynlwcaav03uलाहौर के साहित्य उत्सव में बिकी दार्जिलिंग की चाय